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Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat (Hindi)

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Description

सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और कथाकार खुशवंत सिंह की आत्... Read More

Product Description

सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और कथाकार खुशवंत सिंह की आत्मकथा सिर्फ़ आत्मकथा नहीं, अपने समय का बयान है। एक पत्रकार की हैसियत से उनके सम्पर्कों का दायरा बहुत बड़ा रहा है। इस आत्मकथा के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन के राजनीतिक, सामाजिक माहौल की पुनर्रचना तो की ही है, पत्रकारिता की दुनिया में झाँकने का मौका भी मुहैया किया है। भारत के इतिहास में यह दौर हर दृष्टि से निर्णायक रहा है। इस प्रक्रिया में न जाने कितनी जानी-मानी हस्तियाँ बेनकाब हुई हैं और न जाने कितनी घटनाओं पर से पर्दा उठा है। ऐसा करते हुए खुशवंत सिंह ने हैरत में डालनेवाली साहसिकता का परिचय दिया है। खुशवंत सिंह यह काम बड़ी निर्ममता और बेबाकी के साथ करते हैं। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में औरों के साथ उन्होंने खुद को भी नहीं बख़्शा है। वक्त के सामने खड़े होकर वे उसे पूरी तटस्थता से देखने की कामयाब कोशिश करते हैं। इस कोशिश में वे एक हद तक खुद अपने सामने भी खड़े हैं - ठीक उसी शरारत-भरी शैली में जिससे ‘मैलिस’ स्तम्भ के पाठक बखूबी परिचित हैं, जिसमें न मुरौवत है और न संकोच। उनकी जिंदगी और उनके वक्त की इस दास्तान में ‘थोड़ी-सी गप है, कुछ गुदगुदाने की कोशिश है, कुछ मशहूर हस्तियों की चीर-फाड़ और कुछ मनोरंजन’ के साथ बहुत-कुछ जानकारी भी।

Product Details

Title: Sach Pyar Aur Thodi Si Shararat (Hindi)
Author: Khushwant Singh
Publisher: Rajkamal Prakashan
ISBN: 9788126714841
SKU: BK0422564
EAN: 9788126714841
Language: Hindi
Binding: Paperback
Reading age : All Age Groups

About Author

Khushwant Singh was India's best-known writer and columnist. He was founder-editor of Yojana and editor of the Illustrated Weekly of India, the National Herald and Hindustan Times. He is the author of classics such as Train to Pakistan, I shall Not Hear the Nightingale (retitled as The Lost Victory) and Delhi. His non-fiction includes the classic two-volume A History of the Sikhs, a number of translations and works on Sikh religion and culture, Delhi, nature, current affairs and Urdu poetry. In 2007, he was awarded the Padma Vibhushan. Among the other awards he has received are the Punjab Ratan, the Sulabh International award for the most honest Indian of the year, and honorary doctorates from several universities. He passed away in 2014 at the age of ninety-nine.

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