{"product_id":"shayari-sadabahar-khushboo-sa-bikharna-mera","title":"Shayari Sadabahar : Khushboo Sa Bikharna Mera","description":"\u003cp\u003e“अमीता परसुराम मीता की शाइरी में वजूद की मौलिकता और अद्वितीयता पर ज़ोर हैI मीता के यहाँ एक बड़ी और गहरी तलाश इंसानी रिश्तों की तह तक पहुँचने पर मरकूज़ रही हैI उनकी ये ख़ासियत है कि उन्होंने अपने औरत होने की पहचान का कोई बग़ली स्त्रीवादी फायदा उठाने की कोशिश नहीं की हैI उनकी शाइरी में वाज़ेह तौर पर नज़र आता है कि उसे मर्द और औरत की बाहम टकराती हुई पहचानों से अलग, सिर्फ़ उस की क़द्र-ओ-क़ीमत, ज़बान और बयान की महारत और अनुभवों की गहराई और फैलाव की बुनियाद पर परखा जाएi” - फ़रहत एहसास मीता ज़िंदगी के बंजर और खुरदुरे मसाइल को बयान करते हुए भी शाइरी पर फ़हश निगारी का गुमान नहीं होने देतीं, वो समाज के जब्र और ना-हमवारियों पर चीख़- चीख़ कर अपना गला नहीं छीलतीं बल्कि एक हल्की-सी तंज़िया मुस्कुराहट के साथ अपनी बात कह जाती हैं। परवीन शाकिर की तरह अमीता के लहजे की लौ भी हवा के लम्स से लचकती और बल खाती है, आब- ओ- गिल की रागनी सुनाती है लेकिन तहज़ीब के ख़िरमन को ख़ाकस्तर नहीं होने देती। - डॉ. तारिक़ क़मर मीता , एक हस्सास शाइर और माहिर-ए-नफ़्सियात, दिल्ली यूनिवर्सिटी में 40 साल अध्यापन करते हुए, इंसानी फ़ितरत से जुड़ी अपनी सोच को शेरों में भी ढालती गईं, और यूँ शायरी की दुनिया में इक मुन्फ़रिद लबो-लहजे उभर कर आया! ‘इश्क़ लम्हे’ के बाद, खुशबू-सा बिखरना मेरा इनका दूसरा ग़ज़ल-नज़्म संग्रह है I\u003c\/p\u003e","brand":"Crossword.in","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48819614089433,"sku":"BK0538565","price":199.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0648\/3066\/9017\/files\/81dZ-Ys2aHL._SL1500.jpg?v=1781593813","url":"https:\/\/www.crossword.in\/products\/shayari-sadabahar-khushboo-sa-bikharna-mera","provider":"Crossword.in ","version":"1.0","type":"link"}