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Binding
Paperback
Number of Pages
128
Age Group
All
Language
Marathi
Book Summary
कवि-आलोचक, संपादक, आयोजक और संस्था-निर्माता के रूप में सुप्रतिष्ठित अशोक वाजपेयी पिछले दो दशकों में एक जन-बु़द्धिजीवी के रूप में उभरे और लोकप्रिय हुए हैं। देश भर में, अनेक भाषाओं के साहित्यिक-बौद्धिक-सांस्कृतिक परिसरों में वर्तमान समय, सभ्यता-संकट, संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्रता, साहित्य-संगीत-ललित कलाओं-नृत्य, महात्मा गांधी, नेहरू आदि पर व्याख्यान देने के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाता है। वे पूरी बेबाकी-निडरता से वर्तमान समय के राजनैतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संकटों और विषमताओं पर अपने विचार, तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर रखते हैं। उनके व्याख्यान अपने समय-समाज-लोकतंत्र का मुखर और हिस्सेदार निर्भीक और सुसंगत साक्ष्य हैं। पिछले दो दशकों के 18 महत्त्वपूर्ण व्याख्यान अँधेरे में जलता एक चिराग़ में प्रस्तुत हैं। जतन से व्याख्यानों को इकट्ठा कर उन्हें विषय अनुसार संयोजित और संपादित करने का काम किया हैप्रो. रविकान्त ने। अंबेडकरवादी विचारक, राजनीतिक विश्लेषक, दलित मामलों के विशेष जानकार, साहित्य-समीक्षक सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए निरन्तर लेखन में सक्रिय, प्रो. रविकान्त वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं। एक दर्जन से अधिक उनकी पुस्तकें प्रकाशित हैं और अदहन पत्रिका के आप संपादक हैं।
Product Details
Author
Vajpeyi Ashok
Publisher
Rajpal
Number of Pages
128
Language
Marathi
SKU
BK0538866
ISBN
9789348521729
Reading Age
All
Dimensions
21.6x14x1.2CM
Binding
Paperback
MRP: ₹ 425
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