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Shivaram Dr. Karanth
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Binding
Hardback
Number of Pages
131
Age Group
All
Language
Hindi
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Book Summary
चल खुसरो घर आपने ‘कैसी विचित्र पुतलियाँ लग रही थीं मालती की। जैसे दगदगाती हीरे की दो कनियाँ हों, बार-बार वह अपनी पतली जिह्ना को अपने रक्तवर्णी अधरों पर फेर रही थी, यह तो नित्य की सौम्य-शान्त स्वामिनी नहीं, जैसे भयंकर अग्निशिखा लपटें ले रही थीं ।’ यह कहानी है कुमुद की, जिसे बिगड़ैल भाई-बहनों ने और आर्थिक पारिवारिक परिस्थितियों ने सुदूर बंगाल जाकर एक राजासाहब की मानसिक रूप से बीमार पत्नी की परिचर्या का दुरूह भार थमा दिया है। मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का मनोसंसार, निम्नमध्यवर्गीय परिवार की कमासुत अनब्याही बेटी और उसकी ग्लानि से दबी जाती माँ का मनोविज्ञान, ‘शिवानी’ के पारस स्पर्श से समृद्ध होकर इस उपन्यास को एक अद्भुत नाटकीय कलेवर और पठनीयता देते हैं। ‘विवत’ ?
Product Details
Author
Shivaram Dr. Karanth
Number of Pages
131
Language
Hindi
SKU
BK0443110
ISBN
9788183612876
Reading Age
All
Dimensions
20x14x4cm
Binding
Hardback
MRP: ₹ 495
₹ 471
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