Hiranyakashyap

Kevin Missal

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Binding

Paperback

Number of Pages

672

Age Group

All

Language

English

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Book Summary

प्रतिशोध की आग में जल रहा हिरण्यकश्यप, इंद्र के साम्राज्य को तहस-नहस कर देना चाहता था। लेकिन वह अपने ही पुत्र द्वारा किए गए विरोध से बुरी तरह विचलित था। नरसिंह, प्रह्लाद की तलाश में निकलता है, लेकिन इस सफ़र में उसकी मुलाक़ात अपने एक पुराने मित्र से होती है और एक प्राचीन विष उसके मंसूबों के सामने दीवार बनकर खड़ा हो जाता है। क्रोध में अंधी होलिका अपने भतीजे को ढूंढ़ रही है, लेकिन तभी उसे प्रह्लाद के बचपन की उन दर्दनाक परिस्थितियों का पता चलता है, जो उसे अपने इरादों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर देती हैं। क्या हिरण्यकश्यप इंद्र को पराजित कर पाएगा ? क्या होलिका अपने भतीजे के प्रति अपने क्रोध को भुला पाएगी ? क्या नरसिंह प्रह्लाद को ढूंढ़ पाएगा, और क्या उसके बारे में की गई भविष्यवाणी सच साबित होगी ? यह रोमांचक और अद्भुत यात्रा बेस्टसेलिंग लेखक केविन मिसाल की नरसिंह त्रयी की इस दूसरी किताब में भी जारी है।

Product Details

Author

Kevin Missal

Number of Pages

672

Language

English

SKU

BK0532363

ISBN

9780143481119

Reading Age

All

Dimensions

21x14x2CM

Binding

Paperback

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