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Rajput Brijesh
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Binding
Paperback
Number of Pages
214
Age Group
All
Language
Hindi
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Book Summary
रिपोर्टिंग में लंबा वक़्त बिताने के बाद मैं मानता हूं कि टीवी रिपोर्टर पर्दे पर जो दिखाता है वो कई दफ़ा इससे भी आगे जाता है। वो मौक़े पर सबसे पहले पहुंच कर आख़िर तक वहां रहता है। वहां घटने वाली हर छोटी-बड़ी घटना को वो गहराई से देखता-परख़ता है। उसके पास घटना से जुड़ी इतनी जानकारी होती है जो वो टीवी के तेज़ माध्यम में अक्सर नहीं बता पाता। मगर हर घटना एक रोचक क़िस्सा है। उसकी किस्सागोई अच्छा रिपोर्टर ही कर सकता है, चाहे उसे टीवी पर सुना दे, अख़बार में लिख दे और ना हो तो एक यादगार किताब पाठकों के हाथ में दे दे। इस नई पुस्तक में रिपोर्टिंग के भागादौड़ी के क़िस्से तो हैं ही साथ ही किसी घटना को देखने का रिपोर्टर का नजरिया भी नया है। इसमें कोरोना की मार्मिक कथाएं हैं तो मध्यप्रदेश में 2020 में हुए सत्ता परिवर्तन की उठापटक, उनके उपचुनाव और फिर बीजेपी की वापसी के किस्से हैं। साथ में ही कुछ श्रद्धांजलियां भी हैं अपनों को। काग़ज़ का हो या टीवी के परदे का, रिपोर्टर तब सबसे आसान काम करता है, जब वह वह लिखता या दिखाता है कि जो है नहीं; और सबसे मुश्किल काम तब कर रहा होता है, जब वह वह लिखता या दिखाता है जिसे सब दबाने या छिपाने में लगे होते हैं। यह किताब उस दुनिया का सच बताती है हम जिसे छोड़ते और भूलते जा रहे हैं। इस किताब में जो कहानियां हैं, वे सब उनकी टीवी रिपोर्ट का हिस्सा नहीं बन सकीं, क्योंकि एक माध्यम के रूप में टीवी की अपनी सीमाएं हैं। मगर ब्रजेश ने ये कहानियां बचाए रखीं और अब इस किताब में इन्हें पढ़ते हुए एक तरह का सुकून भी होता है और एक तरह की बेचैनी भी। रिपोर्टर तब सबसे आसान काम करता है जब वह लिखता या दिखाता है जो है नहीं; और सबसे मुश्किल काम तब कर रहा होता है जब वह उसे लिखता या दिखाता है जिसे सब दबाने या छिपाने में लगे होते हैं। ब्रजेश की इस किताब में आप ऐसे प्रसंगों से रूबरू होंगे जो बता सकेंगे कि सच कितना अलग होता है। —कुमार प्रशांत, गांधी शांति प्रतिष्ठान एक बार फिर ब्रजेश राजपूत एक मंझे हुए लेखक के रूप में! क़िस्सागोई और ज़बरदस्त अंदाज़—ए—बयां। ब्रजेश के लेखन में दु:ख, सुख, राजनीति के उतार—चढ़ाव व अनेक घटनाओं का सचित्र वर्णन है, वह भी साक्षी भाव से — वह तमाम चीज़ें जो टीवी रिपोर्टर खबर करने की भाग दौड़ और रिपोर्ट में नहीं बता पाता है। एक बेहतरीन प्रस्तुति। —रशीद किदवई, लेखक और वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश राजपूत कुछ भी लिखें, उसमें कुछ तत्व अनिवार्यत: मिलेंगे — ज़बर्दस्त पठनीयता, शब्दों से दृश्य और भावनाएँ उकेरने की कला, बारीक़ ब्योरों के साथ ही मनोभावनाओं को पकड़ने की महीन संवेदनशीलता जो इतने दशकों से रिपोर्टिंग करते हुए भी न घटी है और न थकी है। ब्रजेश की यह किताब हमें घटनाओं और खबरों के साथ—साथ उनके पीछे की उन सच्चाइयों से रूबरू करवाती है जो कैमरे की पहुँच से परे रहती हैं। —राहुल देव, वरिष्ठ पत्रकार हमारे समय के संजीदा पत्रकारों में एक ब्रजेश राजपूत पहले भी अपने किताबों में पत्रकारिता के पीछे का सच बताते रहे हैं। उनकी यह किताब उस दुनिया का सच बताती है जिसे हम छोड़ते और भूलते जा रहे हैं। मुझे भरोसा है कि यह किताब पढ़ी जाएगी और जिस दुनिया से लोग आंख मिलाने से बचते हैं उस दुनिया से आंख मिलाने पर उन्हें मजबूर करेगी। —प्रियदर्शन, लेखक और पत्रकार
Product Details
Author
Rajput Brijesh
Publisher
Manjul Publishing House
Number of Pages
214
Language
Hindi
SKU
BK0515535
ISBN
9789355430922
Reading Age
All
Dimensions
14 x 1.5 x 22 cm
Binding
Paperback
MRP: ₹ 299
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