Extra 5% Off
Fiction
Non-Fiction
Business & Economics
Children’s Books
Sort By
Relevance
Extra 5% Off on Shopping above Rs.999
Assured 2-4 Days Express Delivery across India.
Extra 10% Off on Shopping above Rs.1,499
Mirza Hadi 'Ruswa'
Historical Fiction
19Th Century Culture
Indian Literature
Women Empowerment
Traditional Storytelling
MRP: ₹ 299
₹ 285
₹ 14 Off
(Incl. of all taxes)
Get this at ₹ 271
Extra 5% Off
Get this at ₹ 257
Extra 10% Off
Binding
Paperback
Number of Pages
224.0
Age Group
All
Language
Hindi
Piracy Free
Secure Transactions
Express Delivery
Eco‑Conscious Packaging
Book Summary
उमराव जान उन्नीसवीं सदी की लखनऊ की तवायफ़ थी जो अपनी खूबसूरती, शोख अदाओं और नाच-गाने के साथ अपनी शायरी के लिए भी मशहूर थी। हर शाम उसका कोठा घुँघरुओं की गूँज, जामों की खनक, शेरो-शायरी की वाहवाही से गुलज़ार हो उठता और खानदानी रईस, जोशीले नवाबज़ादे, नामी गुण्डे, शराबी-कबाबी उसकी रौनक बढ़ाते। उमराव जान अदा पढ़ते पाठक की आँखों के करीब दो सौ साल पहले की लखनवी तहज़ीब की जीती-जागती तस्वीर उभर आती है। लेकिन उमराव जान की चमक शानो-शौकत के पीछे एक छोटी-सी लड़की, अमीरन की दिल को छू लेने वाली दुखभरी कहानी है। कम उम्र में अमीरन का अपहरण कर उसे कोठे पर बेचा जाता है। अमीरन से उमराव जान बनी लड़की का शरीर मजबूरन कोठे पर है, लेकिन उसकी रूह फ़ैजाबाद के अपने घर की तलाश में भटकती रहती है। 1899 में उर्दू में पहली बार उमराव जान अदा प्रकाशित हुई थी। माना जाता है कि लेखक की मुलाकात उमराव जान से एक मुशायरे में हुई और उसने अपनी कहानी बयान की और लेखक ने इसे इस ढंग से लिखा जैसे उमराव जान खुद अपनी दास्तान बयाँ कर रही हो। एक सदी से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी उमराव जान का रोमाँच वैसे ही बरकरार है और लोग आज भी उसके बारे में जानने को बेकरार रहते हैं-चाहे किताब की बाबत हो या फिर फ़िल्म के।
Product Details
Author
Mirza Hadi 'Ruswa'
Publisher
Rajpal
Number of Pages
224.0
Language
Hindi
Reading Age
All
Dimensions
20.32 x 12.7 x 1.27 cm
Binding
Paperback
MRP: ₹ 299
₹ 285
₹ 14 Off