Hindostan HamaraVol12

Jaan Nisar Akhtar

MRP: ₹ 999

₹ 950

49 Off

(Incl. of all taxes)

Offer Section

Extra 5% Off

Add items worth ₹999 to the cart & get extra 5% off
Offer Section

Extra 10% Off

Add items worth ₹1499 to the cart & get extra 10% off

Binding

Paperback

Number of Pages

1053

Age Group

All

Language

Hindi

Piracy Free

Piracy Free

Secure Transactions

Secure Transactions

Express Delivery

Express Delivery

Eco‑Conscious Packaging

Eco‑Conscious Packaging

Book Summary

सुविख्यात शायर जाँ निसार अख़्तर द्वारा दो खंडों में सम्पादित पुस्तक ‘हिन्दोस्ताँ हमारा’ में उर्दू कविता का वह रूप सामने आया है जिसकी ओर इसके पहले लोगों का ध्यान कम ही गया था। प्रायः ऐसा माना जाता है कि उर्दू की शायरी व्यक्ति के प्रेम, करुणा और संघर्ष तक ही सीमित है और समय, समाज, राष्ट्र, प्रकृति तथा इतिहास से उसे कुछ लेना-देना नहीं है। परन्तु यह पूरी तरह एक भ्रान्त धारणा है, इसकी पुष्टि इस पुस्तक के दोनों खंडों में संकलित सैकड़ों कविताओं से होती है। इनमें देश-प्रेम के साथ-साथ भारत की प्रकृति, परम्परा और इतिहास को उजागर करनेवाली कविताएँ भी हैं। हिमालय, गंगा, यमुना, संगम आदि पर कोई दर्जन भर कविताएँ हैं, तो राजहंस, चरवाहे की बंसी और धान के खेत भी अछूत नहीं हैं। होली और वसंतोत्सव जैसे त्योहारों पर भी उर्दू शायरों ने बड़ी संख्या में कविताएँ लिखी हैं। इनमें ‘मीर’ और ‘नज़ीर’ की रचनाएँ तो काफ़ी लोकप्रिय रही हैं। ताजमहल ही नहीं अजंता, एलोरा और नालन्दा के खँडहर पर भी शायरों की नज़र है। देश के विभिन्न शहरों और आज़ादी के रहनुमाओं के साथ-साथ राम, कृष्ण, शिव जैसे देवताओं पर भी कविताएँ लिखी गई हैं। साथ ही ‘कुमार सम्भव’, ‘अभिज्ञान शाकुन्तल’, ‘मेघदूत’ जैसे महान संस्कृत काव्यों का अनुवाद भी उर्दू में हुआ है जिसकी झलक इस संकलन में मिलती है। कुल मिलाकर उर्दू कविता का यह एक ऐसा चेहरा है जो इस संकलन के पहले तक लगभग छुपा हुआ था। भारत की सामासिक संस्कृति में उर्दू कविता के योगदान को रेखांकित करनेवाले इस संकलन का ऐतिहासिक महत्त्व है। पहली बार 1965 में इसका प्रकाशन हुआ था। उर्दू कविता की दूसरी परम्परा, जो वास्तव में मुख्य परम्परा है, को रेखांकित करनेवाला यह संकलन पिछले कई वर्षों से अनुपलब्ध रहा है। अब राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा इसे नई साज-सज्जा के साथ अविकल रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।

Product Details

Author

Jaan Nisar Akhtar

Publisher

Rajkamal Prakashan

Number of Pages

1053

Language

Hindi

SKU

BK0486977

ISBN

9789395737623

Reading Age

All

Dimensions

20.3 x 25.4 x 4.7 cm

Binding

Paperback

Hindostan Hamara : Vols. 1-2

Hindostan HamaraVol12

MRP: ₹ 999

₹ 950

49 Off