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Binding
Paperback
Number of Pages
110
Age Group
All
Language
Hindi
Book Summary
क्या यह सच है कि सारे संसार में विवाह नाम की संस्था अंदर से बिल्कुल टूट चुकी है? क्या आने वाले कल में स्त्री और पुरुष के संबंध इस बंधन से मुक्त होकर ही विकसित होंगे? कल की बात तो कल सामने आएगी, परन्तु आज की जो भी वास्तविकता है, उसका चित्रण आपको विख्यात आधुनिक कथाकार श्री मोहन राकेश की इन कहानियों में मिलेगा।आज का विवाहित जीवन जी रही नारी की विडंबनाओं, मानसिक हलचलों और विभिन्न स्तरों पर उसके संर्घ्ष की कुछ गहन और आत्मीय तसवीरें हैं ये कहानियॉं। ये उन सुहागिनों की कहनिया ँ हैं जिनकी ज़िंदगी आज के संर्द्भ में एक प्रश्न चिह्न बनती जा रही है। यह एक नवीन जीवन की झाँकी प्रस्तुत करनेवाली कथा-कृति है, जिसमें र्व्तमा न समय के सामाजिक जीवन की जीवंत झलक के दर्शन होते हैं। इन कहानियों के पात्रों के मनोभावों का सूक्ष्म विश्लेषण पाठकों पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ जाते हैं।
Product Details
Author
Mohan Rakesh
Publisher
Penguin Random House
Number of Pages
110
Language
Hindi
SKU
BK0485471
ISBN
9780143465348
Reading Age
All
Dimensions
12.9 x 0.8 x 19.8 cm
Binding
Paperback
₹ 199